भांवरकोलः प्रमुखी के लिए अबकी भाजपा में ही ‘काटा-काटी’ और अंसारी बंधु ‘तमाशबीन’!

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    भांवरकोल/गाजीपुर (जयशंकर राय)। ब्लॉक प्रमुख पद के चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग कार्यक्रम कब घोषित करेगा। यह तो नहीं मालूम लेकिन यहां इस प्रतिष्ठापरक पद को लेकर फिल्डिंग सजने लगी है और जो तस्वीर उभर कर सामने आ रही है, उसमें भाजपाइयों में ही आपसी जंग के आसार लग रहे हैं और पिछले चुनावों तक वर्चस्व बनाए रखने वाला अंसारी बंधुओं का खेमा इस बार तमाशबीन की भूमिका में एक ओर खड़ा दिख रहा है। प्रमुख का पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित है।

    कुल 96 सदस्यीय क्षेत्र पंचायत में प्रमुख पद के लिए अब तक मुख्यतः दो दावेदार सामने आई हैं। भाजपा विधायक अलका राय की बहू श्रद्धा राय पत्नी आनंद राय मुन्ना और भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय शंकर राय की बहू शोभा राय पत्नी योगेश राय। श्रद्धा राय के अभियान में विधायक के बेटे पीयूष राय भी कूद गए हैं। उधर शोभा राय पत्नी योगेश राय के लिए खुद विजय शंकर राय गोटी बैठाने में जुटे हैं।

    अंसारी बंधुओं का खेमा न चाहते हुए भी सियासी हालात के हाथों मजबूर होकर जंग-ए-मैदान से किनारे हो गया है। इस खेमे की दावेदार रहीं रतना राय सदस्य का ही चुनाव विधायक अलका राय की बहू श्रद्धा राय से हार चुकी हैं। उनकी ना मौजूदगी में और कोई वैसी ‘सामर्थ्यवान’ सदस्य नहीं है जिस पर कि यह खेमा दाव लगा सके। फिर सांसद अतुल राय जैसा योद्धा भी अब अंसारी बंधुओं के साथ नहीं रह गया है। पिछले चुनाव में अतुल राय ने ही इस खेमे की आखिर में लाज बचाई थी और बीरेंद्र यादव की बहू अंजू प्रमुख चुनी गई थीं।

    खैर मौजूदा सूरते हाल यही है कि प्रमुख पद के चुनाव में सदस्यों की पालेबंदी दो ही जगह होगी। एक श्रद्धा राय और दूसरी शोभा राय के लिए। जाहिर है कि इनके विरोधी एक दूसरे के विरोध में जाएंगे। तब अंसारी बंधुओं का खेमा क्या करेगा। यह तो वक्त आने पर पता चलेगा लेकिन इस खेमे के इलाकाई ‘सूबेदार’ पूर्व प्रमुख शारदानंद राय लुटूर की गतिविधियां श्रद्धा विरोधी ही दिख रही हैं।

    वैसे यह भी कि श्रद्धा बनाम शोभा की जंग में तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिश हो रही है। इसके सूत्रधार मलिकपुरा के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान इंद्रासन राय और उनके संगतिया जसदेवपुर के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान मुन्ना यादव हैं। इनके करीबियों की मानी जाए तो श्रद्धा राय के पति आनंद राय मुन्ना ने खुद इंद्रासन राय को प्रमुखी की तैयारी करने को कहा था। यही वजह रही कि इंद्रासन राय अपने परधानी लड़ने के साथ ही पत्नी सीमा राय को बीडीसी सदस्य का चुनाव लड़ाए। वह जीत भी गईं। इसी तरह मुन्ना यादव भी अपनी पत्नी अलावती देवी को बीडीसी सदस्य बनाने में कामयाब रहे लेकिन आनंद राय मुन्ना उस बात को भुला कर अपनी पत्नी श्रद्धा राय को ही प्रमुख बनाने में लपट गए।

    खैर नहीं लगता कि इंद्रासन-मुन्ना तीसरा मोर्चा बना पाएंगे। तब वह किस पाले में जाएंगे। उस सवाल का जवाब भी आगे ही मिलेगा। फिर एक सवाल यह भी कि समाजवादी किधर जाएंगे। सपा के मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र प्रभारी रहे राजेश राय पप्पू वरिष्ठ नेता इस मसले पर खुल नहीं रहे हैं लेकिन हैरानी नहीं कि समाजवादी ‘एंटी विधायक’ ही रहेंगे। बीडीसी की 30 पिछड़ों और 20 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही है। शेष अनारक्षित सीटों में भी कई पर पिछड़े जीते हैं।

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