पूर्वांचल का आतंक लालू यादव पुलिस मुठभेड़ में ढेर

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    गाजीपुर। पूर्वांचल में आतंक का पर्याय दुर्दांत अपराधी विनोद उर्फ लालू यादव मऊ पुलिस संग हुई मुठभेड़ में ढेर हो गया। मुठभेड़ मऊ में ही शहर से सटे दक्षिण टोला थानांतर्गत भैरोपुर में ही बुधवार तड़के करीब चार बजे हुई। वह मऊ के थाना सरायलखंसी के डोड़ापुर (डाड़ी) का रहने वाला था।

    पुलिस की यह बड़ी उपलब्धि है। डीआईजी आजमगढ़ सुभाषचंद्र दूबे के मुताबिक लालू यादव डी-9 गैंग का सरगना था। उसके विरुद्ध अकेले पूर्वांचल के मऊ, आजमगढ़, बलिया, जौनपुर तथा गाजीपुर में ही कुल 82 मामले दर्ज थे। उनमें लूट, हत्या, हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले थे। उस पर तीन लाख का इनाम भी घोषित था। अपराध जगत की मानी जाए तो पूर्वांचल के देवरिया, कुशीनगर में भी उसका जबरदस्त टेरर था।

    गाजीपुर से उसका पुराना कनेक्शन था। खासकर मऊ से सटे मरदह, कासिमाबाद थाना क्षेत्र में उसकी सक्रियता थी। साल 2003 में अपराध की दुनिया में वह कदम रखा था। मरदह थाने में 2004 में उसके विरुद्ध लूट के दो मामले दर्ज हुए थे। फिर 2005 में ही उसे मरदह पुलिस गैंगस्टर में निरुद्ध की थी। उसके बाद 2013 में लूट और हत्या का प्रयास का मामला कासिमाबाद थाने में दर्ज हुआ था। उस मामले में लूट के माल तथा असलहे संग पकड़ा भी गया था। उसके बाद भी गाजीपुर में उसके मूवमेंट की सूचना पुलिस को प्रायः मिलती रहती थी। उसके गैंग से मरदह क्षेत्र के कई अपराधी जुड़े थे।

    राजनीतिक परस्ती थी हासिल

    लालू यादव को राजनेताओं की सरपरस्ती हासिल थी। प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार में वह कई मंत्रियों से सीधे संपर्क में था। उसे पहचानने वाले गाजीपुर के एक तत्कालीन मंत्री के आवास पर उसे कई बार देखे भी थे। राजनीतिक संबंधों के चलते कई बार पुलिस उसकी जान बख्श दी थी। इधर उसके ताल्लुकात बिहार के भी बाहुबली नेताओं से हो गए थे। बल्कि एक बाहुबली नेता के कहने पर उनके तीन विरोधियों को बारी-बारी से टपकाया भी था।

    राजनीतिक महत्वाकांक्षा में ही गई जान!

    राजनेताओं की सरपरस्ती में रहने के कारण उसकी खुद की भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाग गई थी। बकौल डीआईजी आजमगढ़, उसकी दिली ख्वाहिश विधायक बनने की थी। साल 2015 के पंचायत चुनाव में पत्नी रीमा यादव को अपनी ग्राम पंचायत डाड़ी का प्रधान बनवा दिया था और इस बार उसकी निगाह मऊ के ब्लॉक कोपागंज के प्रमुख की कुर्सी पर थी। उसके लिए अपनी पत्नी को दरसनारायणपुर से बीडीसी के लिए निर्विरोध निर्विरोध निर्वाचित भी करा दिया था जबकि उसकी मां चुनाव लड़ रही है और यही सब राजनीतिक गोटी बैठाने में उसका सामना पुलिस से हो गया।

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