भाजपा नेता का फरार हत्यारा अंबेडकर नगर में एसटीएफ के हत्थे चढ़ा

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    गाजीपुर। भाजपा नेता सभाजीत सिंह के फरार हत्यारे आनंद सिंह को एसटीएफ शुक्रवार को अंबेडकर नगर में धर दबोची। उस पर 25 हजार रुपये का ईनाम घोषित था।

    एडीजे (तृतीय) डॉ.लक्ष्मीकांत राठौर ने इस बहुचर्चित हत्याकांड में आनंद सिंह और उसके बहनोई यशवंत सिंह को बामशक्कत उम्र कैद और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया था। फैसला सुनाए जाते वक्त आनंद कोर्ट में मौजूद नहीं था। लिहाजा न्यायाधीश ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। सुरक्षा के लिहाज से एहतियातन सभाजीत सिंह के घर मंझनपुर कला थाना भुड़कुड़ा में पुलिस के जवान तैनात कर दिए गए थे।

    उसके बाद गाजीपुर पुलिस और एसटीएफ उसकी तलाश में जुट गई थी। सर्विलांस के जरिये गाजीपुर पुलिस उसके ठिकाने तक पहुंचने की जुगत में लगी थी। यहां तक कि उसका फोन लिसनिंग पर डाल दिया गया था। इससे यह पता चला कि वह भागमभाग और तंगहाली से काफी परेशान था और कोई स्थाई कमाई, ठिकाने के लिए अपने कुछ लोगों के संपर्क में था। अपनी इसी कोशिश में वह गाजीपुर पुलिस के राडार पर लगभग आ गया था लेकिन आखिर में बाजी एसटीएफ के हाथ लगी।

    मालूम हो कि  भाजपा नेता सभाजीत सिंह की हत्या उनके ही गांव मंझनपुर कला में दिनदहाड़े छह जुलाइ 2007 को हुई थी। वह घर के पास स्थित शिवमंदिर में पूजा कर लौट रहे थे। रास्ते में पहले से ही घात लगाए गांव के ही आनंद सिंह तथा उसके भाई धीरज सिंह व बहनोई यशवंत सिंह ने उन पर गोलियां दाग दी थी। सभाजीत की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जिला जेल पहुंचा दी थी लेकिन कुछ ही दिनों बाद दोनों भाई आनंद सिंह तथा धीरज सिंह जेल की चहारदीवारी फांद कर फरार हो गए थे और वह अपराध में सक्रिय हो गए थे। उसी क्रम में 18 अप्रैल 2012 को मऊ जिले के चिरैयाकोट थानांतर्गत कर्मी गांव में दिनदहाड़े हुई पुलिस मुठभेड़ में धीरज सिंह ढेर कर दिया गया था। उस मुठभेड़ में तत्कालीन एसएचओ चिरैयाकोट भी शहीद हुए थे जबकि उसके पहले आनंद सिंह गिरफ्तार कर दोबारा जेल पहुंचाया जा चुका  था। बाद में बहनोई संग वह जमानत पर जेल से बाहर आ गया था।

    सभाजीत सिंह की हत्या से राजनीतिक हलके में भी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। तब के वरिष्ठ भाजपा नेता व जिला सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन अरुण सिंह इसको लेकर बेहद मुखर थे। सभाजीत सिंह उस वक्त भाजपा किसान मोर्चा के जिला मंत्री थे। उनके निधन की खबर मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ भी शोक व्यक्त करने उनके घर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी आदित्यनाथ स्व. सभाजीत सिंह की दोनों पुत्रियों के विवाह समारोह में भी आना नहीं भूले। इससे स्पष्ट है कि स्व. सभाजीत सिंह के परिवार से योगी आदित्यनाथ का गहरा आत्मीय जुड़ाव है।

    हालांकि स्व. सभाजीत सिंह का परिवार उनके हत्यारों को कोर्ट से सजा दिलवाने में शुरू से पूरी निडरता से डटा रहा उनके छोटे भाई श्रीराम सिंह वर्तमान में आरएसएस के प्रांतीय प्रचारक हैं और कानपुर में पदस्थापित हैं।

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