प्रख्यात कवि हरिनारायण हरीश ने जम्मू-कश्मीर में लूट ली महफिल, एलजी मनोज सिन्हा का था बुलावा

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    गाजीपुर। जम्मू-कश्मीर में पहली बार गणतंत्र दिवस के मौके पर आयोजित हिंदी कवि सम्मेलन में प्रख्यात कवि गाजीपुर के हरिनारायण हरीश ने महफिल लूट ली। हरीश वहां उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के बुलावे पर पहुंचे थे। उन्हें कवि सम्मेलन की अध्यक्षता की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आयोजन जम्मू-कश्मीर शासन की कला संस्कृति व साहित्य अकादमी ने किया था।

    जम्मू यूनिवर्सिटी के जनरल जोरावर सिंह सभागार में बिते गुरुवार को संपन्न हुए उस कवि सम्मेलन में देश भर के चुनिंदे कवियों को आमंत्रित किया गया था। हरिनारायण हरीश ने दुष्यंत कुमार की परंपरा की कुछ गजलों के साथ ही महाभारत के मिथकों पर वर्तमान संदर्भ में स्वरचित रचनाओं पर खूब तालियां बटोरी। मंचासीन कवियों के आग्रह पर उन्होंने अपनी कविता कर्ण से समापन किया। ओजपूर्ण स्वर में इसकी प्रस्तुति पर स्रोता समूह अपनी जगह से खड़ा हो कर करतल ध्वनि में उत्साहवर्धन किया। उस मौके पर हरीश ने राही मासूम रजा, डॉ. विवेकी राय, भोला नाथ गहमरी व संस्था साहित्य चेतना समाज की चर्चा करते हुए गाजीपुर में हिंदी, उर्दू तथा भोजपुरी की मिश्रित साहित्यिक चेतना का जिक्र करना भी वह नहीं भूले।

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    कवि सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर शासन के प्रधान सचिव नीतीश्वर कुमार की स्वरचित रचनाओं की प्रस्तुति से कई मंचासीन कवियों के लटके-झटके फीके पड़ गए थे। आमंत्रित कवियों में डॉ. विष्णु सक्सेना भुवन मोहिनी की प्रस्तुति भी खूब सराही गई। संचालन डॉ. सुनील योगी ने किया। कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि उप राज्यपाल थे। उन्होंने सबसे पहले आमंत्रित कविजनों को अंगवस्त्रम् से सम्मानित किया। कवि सम्मेलन में यूनिवर्सिटी के शोध छात्रों एवं कुछ प्रोफेसरों ने भी कविता पाठ किया।

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