ताड़ीघाट का कुख्यात सिंटू सिंह मुंबई में लूटा था लाखों के हीरे-जवाहरात, साथियों संग लखनऊ में गिरफ्तार

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    गाजीपुर। गंगा पार थाना सुहवल के ताड़ीघाट का कुख्यात विनय उर्फ सिंटू सिंह का बड़ा कारनामा सामने आया है। साथियों संग उसने मुंबई में लाखों के हीरे-जवाहरात लूटे। अब वह मुंबई पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है।

    मीडिया की खबर के मुताबिक बीते सात जनवरी को मुंबई के एक भीड़-भाड़ वाले इलाके मीरा रोड स्थित ज्वेलरी शॉप एस कुमार गोल्ड एंड डायमंड में उसने दिन दहाड़े लूट की थी।

    उसके बाद से ही मुंबई पुलिस की क्राइमब्रांच उसकी तलाश में थी। पहचान होने के बाद मुंबई क्राइमब्रांच ने यूपी पुलिस की एसटीएफ से मदद मांगी। उसके  साथ ही मुंबई क्राइमब्रांच की टीम वाराणसी आई। उसके बाद एसटीएफ की वाराणसी यूनिट को लेकर सिंटू के गांव सुरागकशी के लिए पहुंची लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली।

    उधर मुंबई क्राइमब्रांच से मिले इनपुट के आधार पर एसटीएफ की लखनऊ यूनिट बुधवार को लखनऊ में ही सिंटू सिंह और उसके साथी दिनेश निषाद निवासी बदेवर थाना केराकत जिला जौनपुर और वाराणसी के थाना चोलापुर गांव कटारी के रहने वाले शैलेंद्र कुमार मिश्र उर्फ बबलू को धर दबोची। उनके कब्जे से मुंबई में लूट के हीरे जवाहरात, साढे पांच लाख रुपये नकद तथा असलहे बरामद हुए।

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    पूछताछ में सिंटू सिंह ने कई सनसनीखेज खुलासे किए। बताया कि वह गैंग बनाकर मेट्रो पोलिटीन शहरों में ज्वेलरी शॉप्स को निशाना बनाता था। पहले उसका गैंग उस शॉप की रैकी करता था। खासकर यह कि उसके आस-पास पुलिस का मूवमेंट क्या है। यह भी बताया कि गैंग की योजना लखनऊ में एक बड़ी ज्वेलरी शॉप को लूटने की थी। उसके बाद गैंग गोवा निकलता। वहां ज्वेलरी शॉप्स के साथ ही कैसीनों को भी लूटने की प्लानिंग थी। सिंटू ने बताया कि उसके गैंग में तीन और साथी शैलेंद्र, संजीत तथा सोनू हैं। फिलहाल वह गिरफ्त से बाहर है। अपने कब्जे से बरामद रिवालवर के बारे में बताया कि यह पुलिस से लूटा गया था। उसे गाजीपुर के ही एक अन्य बदमाश ने दिया था।

    ग्राम प्रधान के चुनाव की तैयारी में था सिंटू

    कुख्यात विनय उर्फ सिंटू सिंह अपनी ग्राम पंचायत ताड़ीघाट में इस बार खुद प्रधान के चुनाव लड़ने की तैयारी में था। पिछले चुनाव में उसने अपने चचेरे भाई संतोष सिंह रिंकू को ग्राम प्रधान के पद पर चुनवाया था। एसएचओ सुहवल ने ‘आजकल समाचार’ को बताया कि सिंटू उनके थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसके विरुद्ध कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। जरायम की दुनिया में वह 1991 से सक्रिय है। उसका एक साथी मनोज दूबे नंदगंज पुलिस के हाथों मुठभेड़ में मारा भी गया था। सिंटू सिंह का इतना बड़ा कारनामा सुनकर उसके गांव ताड़ीघाट के लोग खुद हैरान हैं। अब तक गांव के लोगों को सिंटू सिंह यही बताता था कि वह अन्य जिले व प्रांत में ठेका-पट्टा करता है। सिंटू सिंह गाजीपुर के एक सुनामधन्य नेता के काफिले में प्राय: दिख जाता था।

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