भारतीय अर्थ व्यवस्था को और रसातल में पहुंचा देगी किसान बिलः राधेमोहन सिंह

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    गाजीपुर। समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह किसान बिल को लेकर मोदी सरकार पर बेहद खफा हैं। उनका कहना है कि यह किसान बिल पहले से बिगड़ी भारतीय अर्थ व्यवस्था को और रसातल में पहुंचा देगी।

    शनिवार की शाम ‘आजकल समाचार’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत की 70 फीसद आबादी कृषि पर निर्भर है। भारत के नवनिर्माण में किसानों का अहम योगदान है। बावजूद किसानों की कीमत पर मोदी सरकार चंद पूंजीपतियों को हित साधने का मौका देना चाहता ही है। उसका किसान बिल उसी का परिणाम है। यह बिल किसानों का डेथ वारंट है।

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    पूर्व सांसद ने कहा कि इस बिल को संसद में पास कराने से पहले इस पर डिबेट कराना चाहिए था। इसके मसौदे बनाने से पहले भले न विपक्षी दलों को लेकिन किसान संगठनों को तो विश्वास में लिया ही जाना चाहिए था। उन्होंने तीनों बिलों के प्रावधानों की चर्चा करते हुए कहा कि कृषि मंडियों के बाहर भी खरीद की छूट देने पर इस बात की गारंटी कैसे रहेगी कि किसान अपनी उपज मनचाही रेट पर बेच पाएगा। इस बात की गारंटी कौन देगा कि किसानों को पहले की तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिलता रहेगा। फिर कांट्रेक्ट सिस्टम में विवादों को सिविल कोर्ट की जगह रेवेन्यू कोर्ट में निपटाए जाने से किसानों के हक किस हद तक सुरक्षित रहेंगे। यह भी एक बड़ा सवाल है।

    श्री सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी आंदोलित किसानों के साथ खड़ी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लगायत अदना कार्यकर्ता तक किसानों के समर्थन में सड़क पर उतर रहा है। सरकार समाजवादियों की इस आवाज को पुलिस की लाठी के बल पर दबाने पर आमादा है मगर वह मुगालते में है। उसे याद रखना होगा कि हर जोर जुल्म के विरुद्ध समाजवादियों के संघर्ष की लंबी गौरव गाथा है।

    उसके पूर्व राधेमोहन सिंह पार्टी की ओर से सैदपुर ब्लाक के गांव घोघवा से बिहारीगंज डगरा तक निकली किसान यात्रा में शामिल हुए। घोघवा में हुई किसान गोष्ठी में भी उन्होंने किसान बिल को लेकर सरकार पर खूब तीखे हमले किए और किसानों को भरोसा दिए कि सरकार के इस काले कानून को लेकर शुरू हुए संघर्ष में समाजवादी आखिर तक साथ रहेंगे।

    किसान यात्रा में पार्टी जिलाध्यक्ष रामधारी यादव, कमलेश यादव, लल्लन सिंह, विजय सिंह, मुन्ना यादव, खेदन यादव, बजरंगी बिंद, गोविंद यादव, तकदीर सिंह, बृजेश सिंह, काका चौबे, कल्लू सिंह, शामू यादव आदि प्रमुख लोग शामिल थे।

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