बाहुबली एमएलसी ब्रजेश सिंह की मंशा पर हाईकोर्ट ने फेरा पानी, बहुचर्चित उसरी कांड में जमानत अर्जी खारिज

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    गाजीपुर। बाहुबली एमएलसी ब्रजेश सिंह की जेल से निकलने की मंशा पर इलाहाबाद हाईकोर्ट बुधवार को पानी फेर दी। गाजीपुर के बहुचर्चित उसरी कांड में न सिर्फ उनकी जमानत अर्जी खारिज हो गई बल्कि डिस्ट्रिक्ट जज गाजीपुर को आदेशित किया गया कि अपने यहां चल रहे इस मुकदमे की वह खुद मॉनिटरिंग करें और हर माह सुनवाई कर एक साल में मुकदमे का निस्तारण सुनिश्चित करें।

    देखा जाए तो ब्रजेश सिंह को हाईकोर्ट ने यह करारा झटका दिया है। ब्रजेश सिंह अन्य मामलों में बाइज्जत बरी हो चुके हैं जबकि दो मामलों में उनकी पहले से ही जमानत मंजूर है। एक मात्र उसरी कांड में ही वह जेल में हैं। अगर उसरी कांड में हाईकोर्ट में जमानत अर्जी मंजूर हो गई होती तो तय था कि करीब डेढ़ दशक के कारावास के बाद उनको बाहर निकलने का मौका मिला होता। शायद यही वजह थी कि जमानत अर्जी पर सुनवाई के वक्त उनकी पैरवी में हाईकोर्ट के नामचीन वकीलों की फौज खड़ी थी। हालांकि तब उनके जानी दुश्मन और उसरी कांड के मुकदमा वादी बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की ओर से भी जवाब देने के लिए सरकारी वकील के अलावा दूसरे मशहूर वकील भी डटे थे।

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    हाईकोर्ट की एकल पीठ न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह (प्रथम) दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि याचि की यह दलील कि उसरी कांड के वादी मुकदमा मुख्तार अंसारी पंजाब की रोपड़ जेल में बंद हैं और कोर्ट में अपना बयान देने के लिए नहीं आ रहे हैं। संबंधित कोर्ट उनका बयान वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये ले सकती है। विद्वान न्यायमूर्ति ने तल्ख अंदाज में यह भी कहा कि याचि का न्यायालय के प्रति सहयोगात्मक इतिहास नहीं रहा है। एक अन्य मामले में संबंधित कोर्ट उनको जमानत पर कुछ दिन की रिहाई दी थी मगर उसके बाद वह लगातार 20 साल तक भगौड़ा बने रहे। इस सूरत में याचि की जमानत अर्जी मंजूर करना कतई मुनासिब नहीं होगा। फिर उसरी कांड कोई मामूली घटना नहीं कही जा सकती। वह नृशंस घटना है। उसमें तीन लोगों की सरेराह और दिनदहाड़े हत्या हुई है।

    मालूम हो कि 15 जुलाई 2001 की दोपहर साढ़े 12 बजे मुहम्मदाबाद कोतवाली की उसरी चट्टी पर मुख्तार अंसारी के काफिले पर बकायदा घेरेबंदी कर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। उसमें खुद मुख्तार तो बच गए थे लेकिन उनके सरकारी और निजी अंगरक्षकों सहित तीन लोग मारे गए थे। जवाबी फायरिंग में एक हमलावर मनोज राय भी मारा गया था। वह बक्सर (बिहार) के सगरा गांव का रहने वाला था।

     

     

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